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CGSCPCR HIGHLIGHTS

 

आयोग के कार्य

बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 एवं छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियम 2009 की धारा 9 एवं 10 में आयोग के कार्यों का उल्लेख किया गया है। आयोग के कार्यों को 4 भागों में बांटा जा सकता है।

प्रोत्साहन

1.बाल अधिकारों के लिए निर्मित कानून या कुछ समय के लिए लागू किसी कानून द्वारा प्रदत्त सुरक्षा का परीक्षण और समीक्षा करना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानदण्डों की अनुशंसा करना
2.बाल अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान शुरू करना और उसे बढ़ावा देना ।
3.समाज के विभिन्न वर्गो के बीच बाल अधिकारों के प्रति साक्षरता का प्रसार और इनअधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षा उपायों के बारे में प्रकाशनों मीडिया, सेमीनार व अन्य उपलब्ध साधनों के माध्यम से जागरूकता को प्रोत्साहित करना ।

निगरानी

1.सुरक्षा उपायों पर कार्य की रिपोर्ट देने के लिए आयोग एकदम उपयुक्त हो सकता है। इसलिए आयोग द्वारा केन्द्र सरकार को सालाना या ऐसे ही अंतराल में रिपोर्ट प्रदान करना।
2.संधियों और अन्य अंतराष्ट्रीय सहमतियों का अध्ययन करना और बाल अधिकारों पर वर्तमान नीतियों, कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों की आवधिक समीक्षा करना तथा बच्चों के सर्वोत्तम हितों में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुशंसाएॅं करना
3.किशोर सुधार गृह या किसी सामाजिक संस्था द्वारा संचालित संस्थान सहित केन्द्र सरकार याकिसी राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा संचालित बच्चो के ऐसे आवास गृह या संस्थाका निरीक्षण करना जहां उपचार, सुधार या संरक्षण के लिए बच्चों को निगरानी या हिरासत में रखा गया है । इसके साथ ही आवश्यक होने पर संचालक प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली निवारक कार्यवाही की अनुशंसा करना।

संरक्षण

1.बाल अधिकारों के उल्लंघन और ऐसे प्रकरणों में अनुशंसित कार्यवाही के पालन की जांच करना ।
2.आंतक, साम्प्रदायिक हिंसा, दंगो, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा, एचआईवी/एड्स, ट्रेफिकिंग,दुव्र्यवहार, अत्याचार और उत्पीड़न, अश्लील फिल्म और यौनाचार से बाल अधिकारों केप्रभावित होने के मामलों की जाॅंच और उपयुक्त निवारक मानदंडों की अनुशंसा करना ।
4.संकट में, हाशिये पर तथा वंचित समुदाय के बच्चों, कानूनी मामलों में उलझे बच्चों, किशोरों,परिवार विहीन बच्चों तथा कैदियों के बच्चों सहित विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित मामलों को देखना और उपयुक्त निवारक मानदंडों की अनुशंसा करना
    1.निम्न से संबंधित शिकायतों पर पूछताछ करना और मामलों पर स्वतः संज्ञान लेना -
    2.बाल अधिकारों का अभाव और उल्लंघन
    3.बच्चों के विकास और संरक्षण के लिए बने कानूनों का पालन नहीं होना
    4.बच्चों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत निर्णयों, मार्गदर्शनों और दिशा निर्देशों का क्रियान्वयन न होना या पीड़ित बच्चे को राहत प्रदान न होना या ऐसे मामलों से जुड़े मुद्दों को उपयुक्त प्राधिकारियों द्वारा हल न किया जाना।

अतिरिक्त

इस तरह के अन्य कार्य जो बाल अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समझे गए हो और उपरोक्त कार्यो से संबंधित अन्य मामले।